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शेयर बाजार की मूल बातें

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सवाल: आप उत्तर गुजरात के बनासकांठा क्षेत्र में कई दिनों से हैं पिछले चुनाव में भाजपा 9 में से दो ही सीटें जीत सकी थी। इस बार प्रत्याशी चयन में भारी विरोध भी है। क्या कहेंगे आप?

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Chandrakala New Song: युवा गायिका चन्द्रकला का एक और नया गीत ‘बांज का बोट’ हुआ रिलीज, हमेशा की तरह लोगों को आकर्षित कर रही है चन्द्रकला की मधुर आवाज…

गायिका चन्द्रकला ने बताया कि वह मूल रूप से राज्य के पिथौरागढ़ जिले के थल क्षेत्र के कुमालगांव की रहने वाली है। बता दें कि वर्तमान में लखनऊ में अध्यापिका के पद पर कार्यरत चन्द्रकला का नया कुमाऊनी गीत बीते दिनों उनके आफिशियल यूट्यूब चैनल से रिलीज हो गया है। हमेशा की तरह जहां चन्द्रकला ने खुद ही इसे अपने शब्दों में लिपिबद्ध किया है वहीं उनकी मनमोहक मधुर आवाज के साथ ही गीत के बोल भी लोगों को काफी पसंद आ रहे हैं। गीत में हर्षित जोशी द्वारा दिया गया बेहद खूबसूरत संगीत भी गीत की खूबसूरती में चार चांद लगा रहा है। इसके साथ ही गीत में मोहन जोशी की बांसुरी और आयुष कपर्वान की हारमोनियम की मधुर धुन भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। बताते चलें कि गायिका चन्द्रकला के इससे पूर्व में रिलीज हुए गीत ‘मेरी माया’ को भी लोगों द्वारा खासा पसंद किया गया था। यह गीत गायिका चन्द्रकला के सुप्रसिद्ध गीतों में शामिल हैं।

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MCD Election 2022: शेयर बाजार की मूल बातें शेयर बाजार की मूल बातें बीजेपी-आप एक-दूसरे पर उंगली उठाने में मशगूल, कोई नहीं कर रहा राजधानी की समस्याओं की बातें

फोटो: सोशल मीडिया

सैय्यद खुर्रम रज़ा

2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री (अब दिवंगत) शीला दीक्षित ने दिल्ली नगर निगम का तीन हिस्सों में विभाजन किया था, तो उनके दिमाग में दिल्ली के हित भी थे। तब कहा गया था कि दिल्ली आबादी के लिहाज से बढ़ रही है और उस हिसाब से सफाई, देखरेख, ट्रैफिक आदि समस्याएं बढ़ रही हैं इसलिए निगम का विभाजन बहुत जरूरी है। आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि विभाजन से जन्म लेने वाली समस्याओं के समाधान के लिए निगम को दोबारा एक तो किया गया है लेकिन क्या वाकई यह समस्या का समाधान है या वोट की राजनीति से प्रेरित है। हो सकता है कि शीला दीक्षित ने विभाजन के वक्त अपने राजनीतिक लाभ को दिमाग में रखा होगा लेकिन इसमें शक नहीं कि उन्होंने दिल्ली के लोगों के हितों को नजरंदाज नहीं किया था।

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निगम चुनाव पर पूरे मुल्क की नजर इसलिए भी है कि दिल्ली में होने वाली किसी भी राजनीतिक गतिविधि का असर पूरे देश में देखने को मिलता है। वैसे भी, बीजेपी और आम आदमी पार्टी- दोनों ही 24 घंटे 365 दिन चुनावी राजनीति के मोड में रहती हैं बल्कि इस मामले में दोनों एक-दूसरे से शेयर बाजार की मूल बातें होड़ करती रहती हैं। बीजेपी की जननी जनसंघ ने सबसे पहला चुनाव दिल्ली नगर निगम का ही जीता था और उसके बाद देश की राजनीति में एक नए दल के तौर पर कदम रखा था। वरिष्ठ पत्रकार दिलबर गोठी कहते भी हैं कि ’1958 का 80 सदस्यों वाला नगर निगम कभी तीन हिस्सों में बंटा और अब फिर एक हो गया है। सदस्यों की संख्या 272 तक बढ़ते हुए अब घटकर 250 पर आ गई है।’ ऐसे में यह चुनाव दिलचस्प हो गया है।

आम आदमी पार्टी ने साल 2013 में दिल्ली की सत्ता संभाली और तब से दिल्ली की राजनीति में एक बड़ी तब्दीली आई है। वैसे, दिल्ली मुख्य तौर पर दो राजनीतिक दलों- कांग्रेस तथा बीजेपी का गढ़ मन जाता था लेकिन आम आदमी पार्टी अब महत्वपूर्ण तीसरी खिलाड़ी है। उसकी आकांक्षा पूरे देश में अपना दबदबा बनाने की है। पंजाब में भी उसकी सरकार है। दिल्ली में चाहे वह संसद की कोई सीट जीतने में नाकाम रही हो और दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र संघ के चुनाव में कोई सीट न जीत पाई हो लेकिन वह कम-से-कम निगम पर कब्जा करना चाहती है जबकि बीजेपी निगम से अपनी सत्ता जाने नहीं देना चाहती। दिल्ली की सत्ता में आने के बावजूद आम आदमी पार्टी 2017 में बीजेपी को मात नहीं दे पाई थी। बीजेपी निगम पर पिछले 15 वर्ष से काबिज है।

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प्रचार कम-से-कम सोशल मीडिया पर तो पूरे शबाब पर है। तरह-तरह के आरोप-प्रत्यारोप और अपने-अपने दावे-वादे वाले वीडियो लगभग हर व्यक्ति के फोन-वाट्सएप पर हैं। चूंकि केन्द्र और निगम में बीजेपी तथा दिल्ली में आम आदमी पार्टी सत्ता में है इसलिए उनके कामकाज के परीक्षण का यह मौका है और इसलिए अपने बचाव में दोनों ही पक्ष एक-दूसरे पर ज्यादा से ज्यादा उंगली उठा रहे हैं। आम आदमी पार्टी इन चुनावों में जहां अपने स्कूल और मोहल्ला क्लिनिक के ’बेहतर’ होने को तो शो केस कर ही रही है, वहीं कूड़े के पहाड़ और निगम के कर्मचारियों की तनख्वाहों को मुद्दा बना रही है। दूसरी तरफ, शेयर बाजार की मूल बातें बीजेपी वही पुराने और आजमाए हुए तरीके- मोदी के चेहरे को आगे कर रही है। वह नहीं चाहती कि कूड़े, नगर निगम के स्कूलों, अस्पतालों, गलियों-कूचों के रखरखाव, प्रॉपर्टी टैक्स, पार्क या पार्किंग वगैरह पर ज्यादा बात हो क्योंकि ये उसकी कमजोर नसें हैं। इसीलिए वह आम आदमी पार्टी के भ्रष्टाचार को ही मुद्दा बनाने शेयर बाजार की मूल बातें का हरसंभव प्रयास कर रही है। आम आदमी पार्टी के टिकट बेचने की खबर और मंत्री सत्येंद्र जैन की जेल से जारी वीडियो को उसने मुद्दा बनाने का पूरा प्रयास किया है। उधर, कांग्रेस विकास को ही मुख्य मुद्दा बनाने की कोशिश में है। शीला दीक्षित के कामकाज को वोटरों के बीच रखकर वह उन दिनों की यादें उभार रही है जब दिल्ली का वास्तविक विकास हो रहा था। वह प्रॉपर्टी टैक्स माफ करने की बात तो कर ही रही है, उसने दिल्ली में बिजली में भ्रष्टाचार से होने वाले नुकसान को मुद्दा बनाया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व बिजली मंत्री अजय माकन का कहना है कि ’केजरीवाल सरकार का बिजली मॉडल बेरोजगारी और भ्रष्टाचार का मॉडल है क्योंकि दिल्ली में बिजली के निजीकरण बिजली की चोरी आई कमी का फायदा लोगों को न मिलकर बिजली की निजी कंपनियों को दिया जा रहा है। साथ में 30 प्रतिशत फर्जी सब्सिडी ग्राहक हैं जिनका पैसे का कोई हिसाब नहीं दिया जा रहा। आखिर, दिल्ली में बिजली की चोरी सबसे कम होने के बावजूद इसके रेट सबसे ज्यादा क्यों हैं? ज्यादा रेट होने की वजह से दिल्ली में मैन्युफैक्चरिंग यूनिटें बंद हुई हैं और इसी कारण दिल्ली में बेरोजगारी जबरदस्त बढ़ी है।’

अगले साल शहर के प्रमुख रूटों पर दोड़ेंगी इलेक्ट्रिक बसें, जानें रूट

लोगों को ऑटो, टेंपो और डग्‍गामार बसों पर नहीं रहना पड़ेगा निर्भर. (सांकेतिक तस्‍वीर)

  • News18 हिंदी
  • Last Updated : November 28, 2022, 20:47 IST

गाजियाबाद. शहर के सभी प्रमुख रूटों पर अगले साल से इलेक्ट्रिक बसें चलेंगी, जिससे लोगों को आटो,टेंपो और डग्‍गामार बसों पर निर्भर न रहना पड़े. रोडवेज अधिकारियों के अनुसार अगले साल शुरू होने वाली बसों में सबसे ज्‍यादा राजनगर एक्‍सटेंशन से कौशांबी डिपो और पुराने बस अड्डे से लाल कुआं के बीच चलेंगी. मौजूदा समय शहर में चार रूटों पर इलेक्ट्रिक बसों का सफल संचालन हो रहा है.

परिवहन निगम नए साल पर 150 इलेक्ट्रिक बसों का तोहफा गाजियाबाद के लोगों को देगा. इन बसों के जल्द मिलने की उम्मीद में रूट भी तैयार कर लिए गए है. क्षेत्रीय प्रबंधक एके सिंह ने बताया कि अभी शहर में 30 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन हो रहा है. इसके अलावा 15 बसें डिपो पर हैं. जल्‍द ही पांच और बसें मिल जाएंगी. इन बसों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया चल रही है. प्रक्रिया पूरी होते ही बसें शहर के रूटों पर दौड़ेंगी.

आपके शहर से (दिल्ली-एनसीआर)

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गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण के मतदान को अब दो दिन बाकी है। ऐसे में भाजपा के आला नेताओं ने यहां डेरा डाला हुआ है। भाजपा गुजरात में न सिर्फ फिर से सरकार बनाने का दावा कर रही है बल्कि रेकॉर्ड सीटें जीतने की बात भी कर रही है। भाजपा नेताओं के बगावती तेवर, आम आदमी पार्टी की एंट्री और कांग्रेस के दावों के बीच यह सब कैसे यह संभव होगा, उस पर मध्यप्रदेश के गृहमंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा से पत्रिका संवाददाता उदय पटेल/नगेन्द्र सिंह की बातचीत के कुछ अंश।

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